महावीर पुन की जीवन कथा

महावीर पुन की जीवन कथा पर आधारित पुस्तक
“अब तक 60,000 प्रति किताब बिक चुकी है,” पुन ने कहा, “अब मैं किताबें बेचने के लिए अलग-अलग जिलों में जा रहा हूं।” किताब की कीमत 750 रुपये है. इसी संख्या को 60,000 से गुणा करने पर यह चार करोड़ 50 लाख आती है. पुन ने कहा कि किताबों की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग बीरगंज में कृषि उपकरण कारखाने के मर्मत सम्भार के लिए किया जाएगा। वे किताब बेचने के लिए फिर से देश के अलग-अलग जिलों में जा रहे हैं. इसके अलावा उनकी किताब विदेशों में भी बहुत बिक रही है.

नेशनल इनोवेशन सेंटर के सहायता के लिए नेपाल के वैज्ञानिक डॉक्टर महावीर पुन – पुस्तक बिक्री के लिए देश के पूर्व-पश्चिम महाअभियान पर निकल पड़े हैं। ३० साल से बन्द पड़ा वीरगञ्ज कृषि औजार कारखाना, को दुबारा चालु करने के लिए, डॉ. महावीर पुन ने अपनी जीवन कथा पर आधारित पुस्तक बिक्रि सुरु कर दिया है ‘

नेपाल के बैज्ञानिक एवंम राष्ट्रिय आविष्कार केन्द्रका संस्थापक महावीर पुन, इस समय नेपाल के विभिन्न जिले में गांव-गांव जाकर अपनी जीवनी कथा किताबें बेच रहे हैं,

वह अपनी जीवनी पर आधारित महावीर पुन- सम्झना, सपना र अविरल यात्रा’
नामक पुस्तक की तिन लाख प्रतियां बेचने के लिए नेपाल के कोने-कोने की यात्रा कर रहे हैं।

वह बीरगंज में कृषि उपकरण फैक्ट्री स्थापित करने के इरादे से किताबें बेच रहे हैं।

डॉ. पुन ने कहा कि जब वह सुदूर पश्चिम के महेंद्र नगर से Dang पहुंचे, तब तक 60,000 से अधिक किताबें बिक चुकी थीं। वह 750 रुपये प्रति किताब बेच रहे हैं।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए, महाबीर पुन ने कहा कि उनकी किताब की अब टक साठ हजार से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।

पुन ने कहा, “अगर इस देश के एक तिहाई नागरिक, लगभग तिन लाख मेरी किताब खरीदते हैं, तो लगभग 16 करोड एकत्र हो जाएंगे।”

महावीर पुन ने कहा कि वे इसके प्रवर्तक हैं और पुस्तक खरीदने वाला प्रत्येक व्यक्ति कृषि कारखाने की स्थापना में हिस्सेदार होगा.

पुन ने कहा, ‘जब सभी युवा विदेश पलायन कर रहे हैं तो निराश युवाओं की सोच को बदलना और उनमें प्रेरणा भरना बहुत जरूरी है।’

महावीर पुन ने कहा कि कृषि यंत्र स्थापित होने से करीब 600 लोगों को रोजगार मिलेगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान में सभी कृषि उपकरण पड़ोसी मुलुक भारत और चीन से आयात किये जाते हैं।

बताया कि अगर नेपाल में एक कृषि उपकरण फैक्ट्री स्थापित की जाती है, तो यह कम से कम 6 से 7 प्रतिशत आयात को रोक सकता है, लेकिन यह उस देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

महावीर पुन ने कहा कि सिर्फ राज्य को दोष देना जरूरी नहीं है और प्रत्येक नागरिक को परिस्थिति के अनुरूप राज्य बनाने में अपना योगदान देना जरूरी है.
“अगर नेपाल सरकार ने राष्ट्रिय आविष्कार केन्द्र में निवेश किया होता तो बेहतर होता।”

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